रूद्रसेना के पांच साल के अभियान के बीच बड़ा घटनाक्रम, भूमिहीन मूल निवासी किसानों को जमीन देने की उठी मांग
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पुरटाड़, 17 अक्टूबर। जौनसार-बावर के पुरटाड़ गांव में अनुसूचित जनजाति की जमीन से जुड़े मामले में आठ परिवारों ने मकान खाली कर जमीन से कब्जा छोड़ दिया। रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। किसान अजमेर सिंह चौहान ने अभियान की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए वरदान बताया।
रूद्रसेना पिछले करीब पांच वर्षों से क्षेत्र में भूमि अधिकारों और पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग उठा रही है। संगठन ने वर्ष 1951-52 और 1983 के बंदोबस्त रिकॉर्ड का वर्तमान राजस्व अभिलेखों से मिलान कराने की मांग की है।
राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि जौनसार-बावर और देवघार के भूमिहीन मूल निवासी किसानों को पात्रता और कानूनी प्रावधानों के अनुसार जमीन उपलब्ध कराने के लिए शासन को योजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े मामलों का निस्तारण दस्तावेजों और कानून के आधार पर होना चाहिए।
अजमेर सिंह चौहान ने कहा कि लंबे समय से जमीन के अधिकारों को लेकर परेशान किसानों के लिए यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वहीं, संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य भूमि अधिकारों की रक्षा करना और राजस्व अभिलेखों की वास्तविक स्थिति सामने लाना है। क्षेत्रवासियों की निगाहें अब जमीन से जुड़े अन्य मामलों की जांच और कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

