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सेलाकुई (देहरादून)। सेलाकुई स्थित एक फार्म हाउस में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय आदिवासी प्रतिनिधि सम्मेलन के प्रथम दिवस का रविवार को समापन हो गया। शनिवार से शुरू हुए इस सम्मेलन में कश्यप, कहार, निषाद, भोई समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद शामिल हुए। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. निषाद ने कहा कि समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान आपसी संवाद और समन्वय से ही संभव है। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की सामाजिक परिस्थितियों और चुनौतियों से अवगत कराया है, इन सुझावों को गंभीरता से समझकर संबंधित स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं की भागीदारी के साथ-साथ पारंपरिक जलजीवी समुदायों की आजीविका और सामाजिक-आर्थिक विकास पर विशेष ध्यान देना होगा। अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाने से न केवल समन्वय मजबूत होगा, बल्कि समुदाय के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में भी मदद मिलेगी।
सम्मेलन के दौरान जनप्रतिनिधित्व, जातिगत जनगणना में पहचान, संवैधानिक अधिकार, पारंपरिक जलजीवी समुदायों के समग्र विकास और आपदा प्रबंधन में समुदाय की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
इस मौके पर अखिल भारतीय आदिवासी कश्यप कहार निषाद भोई समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा मोर्चा नीरज कश्यप राजपूत ने कहा कि संगठन को मजबूत कर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर एकजुट होकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।

