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पांच साल से भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग, संगठन ने न्यायालय में प्रस्तुत किया अपना पक्ष
चकराता/त्यूनी, 16 अक्टूबर। जौनसार-बावर क्षेत्र की करीब 700 बीघा भूमि से जुड़े विवाद को लेकर शुक्रवार को चकराता और त्यूनी तहसीलों में रुद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड-हिमाचल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। संगठन ने भूमि अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने और कथित अवैध कब्जों की पुष्टि होने पर भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग उठाई। संगठन के अनुसार, वह पिछले पांच वर्षों से इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहा है।

रुद्रसेना के मुताबिक, जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश पर उपजिलाधिकारी त्यूनी को बेदखली की कार्रवाई के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद संबंधित प्रकरण में न्यायालय की ओर से नोटिस जारी किए गए। शुक्रवार को चकराता और त्यूनी में संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित हुए और मामले में अपना पक्ष रखा। संगठन ने संबंधित भूमि के अभिलेखों की जांच कर नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की।
चकराता तहसील में की नारेबाजी
चकराता तहसील परिसर में रुद्रसेना के कार्यकारी अध्यक्ष अंकित तोमर, महामंत्री सचिन खन्ना और अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। संगठन के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी भी मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग करते हुए नारेबाजी की। संगठन ने आरोप लगाया कि वर्ष 1983 में भूमि अभिलेखों में नियमों के विपरीत नाम दर्ज किए गए थे। हालांकि, इन आरोपों की वैधानिक पुष्टि जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर होनी है।
एसडीएम की अनुपस्थिति पर जताया असंतोष
संगठन ने न्यायालय में लिखित पक्ष प्रस्तुत करने के बाद उपजिलाधिकारी की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। पदाधिकारियों ने मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग करते हुए कहा कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र की भूमि की सुरक्षा के लिए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
त्यूनी में भी जुटे कार्यकर्ता
त्यूनी तहसील में संगठन के अध्यक्ष मनोज बिजल्वाण के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। यहां भी भूमि विवाद के निस्तारण और कथित अवैध कब्जों के मामलों में कार्रवाई की मांग उठाई गई। संगठन ने स्पष्ट किया कि भूमि प्रकरण का समाधान होने तक उसका संघर्ष जारी रहेगा।
दो व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत
रुद्रसेना ने आरोप लगाया कि घटनाक्रम के दौरान बिन्याबीन और जाकिर नाम के दो व्यक्तियों ने संगठन के पदाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। संगठन के अनुसार, इस संबंध में कोतवाली चकराता में लिखित शिकायत दी गई है। संगठन ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
भूमि संरक्षण को बताया संघर्ष का उद्देश्य
रुद्रसेना के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि जौनसार-बावर अनुसूचित जनजाति क्षेत्र है और यहां भूमि से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि वर्ष 1983 के भूमि अभिलेखों की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए और यदि अवैध कब्जा प्रमाणित होता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की भूमि और स्थानीय जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना है।
ये रहे मौजूद
प्रदर्शन एवं न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान राकेश उत्तराखंडी, संगठन मंत्री भानु प्रताप सिंहराणा, अध्यक्ष मनोज बिजल्वाण, कार्यकारी अध्यक्ष अंकित तोमर, महामंत्री सचिन खन्ना, केसर सिंह चौहान, विजयपाल डोभाल, जयपाल सिंह, रामानंद शर्मा, अनु सिंगाराम शर्मा, सोहन सिंह, महेंद्रनाथ, चंदन सिंह राणा, रडु और चमन राणा सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

