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पछवादून सहित पूरे देहरादून जनपद में इस समय भीषण गर्मी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो इन्द्रदेव रूठ गए हों और आसमान से आग बरसा रहे हों। शनिवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जबकि मौसम विभाग ने आज तापमान में और वृद्धि की संभावना जताई है। फिलहाल बारिश के कोई स्पष्ट आसार नहीं हैं, जिससे लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। सामान्य दिनों में चहल-पहल से भरे रहने वाले बाजारों में इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई दिए। अधिकांश लोगों ने जरूरी काम भी टाल दिए और घरों में ही रहना बेहतर समझा।
गर्मी का आलम यह है कि कई स्थानों पर एसी और कूलर भी राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। लगातार बढ़ते तापमान के कारण बिजली की मांग भी बढ़ गई है। यदि बिजली आपूर्ति में थोड़ी भी बाधा आती है तो लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता है।
इस भीषण गर्मी का सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, फेरी वालों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ रहा है। तेज धूप में काम करना उनकी मजबूरी है, लेकिन इससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। लू लगने, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।
पशु-पक्षी भी इस भीषण गर्मी से बेहाल हैं। जल स्रोत सूखने लगे हैं और पक्षी पानी की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं। ऐसे समय में लोगों का दायित्व है कि वे अपने घरों और दुकानों के बाहर पानी के बर्तन रखें, ताकि बेजुबान जीवों को भी राहत मिल सके।
लगातार बढ़ती गर्मी यह भी संकेत देती है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन की कठोर वास्तविकता बन चुका है। अनियंत्रित शहरीकरण, हरियाली में कमी और पर्यावरणीय असंतुलन ने गर्मी की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी विकट हो सकती है।
प्रशासन को भी चाहिए कि सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करे, अस्पतालों को हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए तैयार रखे तथा लोगों को गर्मी से बचाव के उपायों के प्रति लगातार जागरूक करे।
फिलहाल हर किसी की निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं। लोग इन्द्रदेव से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द मेहरबान हों और बारिश की फुहारों से तपती धरती तथा झुलसते जनजीवन को राहत दें। तब तक सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है—बिना आवश्यक कार्य के दोपहर में घर से बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार तथा आसपास के जरूरतमंद लोगों का भी विशेष ध्यान रखें।

