अजय शर्मा
शनिवार को विकासनगर की शक्ति नहर के किनारे जो कुछ भी हुआ, उसने मानवता और मातृत्व दोनों को झकझोर कर रख दिया है। एक माँ, जो कुछ ही देर पहले अपनी एक बेटी को सीने से लगाकर दूध पिला रही थी और दूसरी को अपनी बाहों में भरकर दुलार कर रही थी, अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसकी ममता पर गहरा अंधकार छा गया? ऐसा क्या गुजरा होगा उस दिल पर, जिसने अपनी ही दो मासूम बच्चियों को मौत के हवाले करने के लिए शक्ति नहर के तेज बहाव में फेंक दिया और फिर खुद भी उसी मौत के आगोश में कूद गई? यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य या आत्महत्या का प्रयास नहीं है, बल्कि हमारे समाज के ताने-बाने पर एक गहरा और परेशान करने वाला सवालिया निशान है।
देवदूत बनकर आए मुकर्रम और शोएब
इस दिल दहला देने वाली घटना में जहाँ एक तरफ माँ का क्रूर फैसला था, वहीं दूसरी तरफ इंसानियत का एक बेहद खूबसूरत और जांबाज चेहरा भी सामने आया। स्थानीय निवासी मोहम्मद मुकर्रम और मोहम्मद शोएब ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत नहर में छलांग लगा दी। इन दोनों युवकों की मुस्तैदी और बहादुरी के कारण दोनों मासूम बच्चियों को सुरक्षित और जीवित बाहर निकाल लिया गया। मुकर्रम और शोएब का यह कदम यह याद दिलाता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है, और वे उन बच्चियों के लिए किसी देवदूत से कम साबित नहीं हुए।
प्रेम विवाह से आत्मघाती कदम तक का सफर
पुलिस और जल पुलिस की टीमें अभी भी २८ वर्षीय किरन चंदेल की तलाश में नहर में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। लेकिन इस पूरी घटना के पीछे का सबसे बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—”आखिर क्यों?”
जानकारी के मुताबिक, किरन चंदेल ने वर्ष 2020 में धीरज चंदेल से प्रेम विवाह किया था। एक ऐसा रिश्ता जो पसंद, प्यार और साथ जीने-मरने के वादे के साथ शुरू हुआ था, वह महज़ छह साल के भीतर इस खौफनाक मोड़ पर कैसे पहुँच गया?
आमतौर पर प्रेम विवाह के बाद उम्मीद की जाती है कि आपसी समझ बेहतर होगी, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि भीतर सुलग रही चिंगारी को समाज और परिवार भांपने में नाकाम रहे।
पर्दे के पीछे के संभावित कारण
हालांकि वास्तविक कारणों का खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो पाएगा, लेकिन इस तरह के आत्मघाती कदमों के पीछे अक्सर कुछ मुख्य कारण होते हैं, जिन पर समाज को गौर करने की जरूरत है ।
घरेलू कलह और मानसिक उत्पीड़न: कई बार वैवाहिक जीवन में अपेक्षाएं टूटने और लगातार होने वाले मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न के कारण इंसान का मानसिक संतुलन डगमगा जाता है।
प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression): बच्चे के जन्म के बाद कई महिलाएं गंभीर मानसिक तनाव और अवसाद से गुजरती हैं, जिसे हमारे समाज में अक्सर ‘सामान्य मूड स्विंग’ कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह अवसाद कभी-कभी इस हद तक बढ़ जाता है कि महिला को अपने बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय लगने लगता है।
अकेलापन और संवाद की कमी: जब एक महिला अपने दुखों को किसी से साझा नहीं कर पाती और चारों तरफ से खुद को अकेला पाती है, तो वह ऐसे चरम और आत्मघाती फैसले ले लेती है।
अब भी वक्त है जागने का
किरन चंदेल का शक्ति नहर में कूदना महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक ढांचे की नाकामी है। हम अक्सर तब जागते हैं जब पानी सिर से ऊपर गुजर जाता है। जरूरत इस बात की है कि परिवारों में संवाद का माहौल बने। अगर कोई महिला या पुरुष मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो उसे ताना मारने के बजाय चिकित्सीय और पारिवारिक सहयोग दिया जाना चाहिए।
पुलिस को इस मामले की तह तक जाना होगा ताकि यह साफ हो सके कि किरन को इस नहर तक खींचकर लाने वाली परिस्थितियां क्या थीं। बच्चियों की जान बच जाना एक चमत्कार है, लेकिन समाज के तौर पर हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी और माँ को अपनी ममता का इस तरह गला न घोटना पड़े।

