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किसी भी क्षेत्र का मुख्य बाजार वहाँ की जीवनरेखा होता है, जहाँ रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन सहसपुर बाजार आज अपनी इस पहचान को खो चुका है। यह बाजार अब आमजन की सुविधा का केंद्र न रहकर शराबियों के हुड़दंग का अड्डा बन चुका है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नियम-कानूनों को ताक पर रखकर यहाँ मुख्य मार्ग पर एक-दो नहीं, बल्कि तीन-तीन शराब की दुकानें (अंग्रेजी, बीयर और देशी) संचालित की जा रही हैं। प्रशासन की यह अनदेखी स्थानीय जनता के लिए एक बड़ी जी का जंजाल बन चुकी है।
नियमों की धज्जियां उड़ाता आबकारी विभाग
आबकारी नीति के अनुसार, शराब के ठेकों को खोलते समय राष्ट्रीय व राज्यीय राजमार्गों से दूरी और सार्वजनिक स्थलों की मर्यादा का ध्यान रखना अनिवार्य है। लेकिन सहसपुर में इन मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
धार्मिक स्थल की उपेक्षा: इन तीन दुकानों के ठीक पास में धार्मिक स्थल स्थित है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुँच रही है।
मुख्य मार्ग पर जमावड़ा: मुख्य बाजार और व्यस्त मार्ग पर ठेके होने के कारण शाम ढलते ही यहाँ का नजारा बेहद खौफनाक हो जाता है।
शाम ढलते ही थम जाती हैं कदम, सहम जाती हैं महिलाएं
सूरज ढलते ही इन दुकानों पर अराजक तत्वों और शराबियों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। मुख्य मार्ग पर ही खुलेआम जाम छलकने लगते हैं, गाली-गलौज और हुड़दंग आम बात हो चुकी है। इस माहौल का सबसे बुरा असर क्षेत्र की महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा है। शाम के समय इस मार्ग से महिलाओं का अकेले गुजरना दूभर हो गया है। मनचलों की फब्तियों और असुरक्षित माहौल के डर से स्थानीय लोगों ने शाम को बाजार आना ही बंद कर दिया है, जिससे स्थानीय व्यापारियों के व्यापार पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
”क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? धार्मिक स्थलों के पास और मुख्य बाजार में तीन-तीन ठेके खोलना सीधे तौर पर सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ना है।”
शिकायतों का अंबार, पर कार्रवाई सिफ़र
ऐसा नहीं है कि इस समस्या से शासन-प्रशासन अनजान है। क्षेत्रवासी इस अराजकता के खिलाफ कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। आंदोलन और गुहार के बावजूद आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। अधिकारियों की यह रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
क्या राजस्व की कमाई जनता की सुरक्षा और मान-मर्यादा से बड़ी है?
मानकों के विपरीत इन दुकानों को लाइसेंस देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
सहसपुर बाजार की यह स्थिति केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता का चरम है। सरकार एक तरफ महिला सुरक्षा और ‘बेटी बचाओ’ के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के रास्ते में शराबियों के अड्डे सजने दिए जा रहे हैं। प्रशासन को तुरंत इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। इन दुकानों को तत्काल मुख्य मार्ग और धार्मिक स्थल के पास से हटाकर किसी गैर-आवासीय क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। यदि जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का यह आक्रोश किसी बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।

