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देहरादून। उत्तराखंड में लंपी स्किन डिजीज (LSD) ने एक बार फिर पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के देहरादून, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, पौड़ी, हरिद्वार, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिलों में अब तक 635 मामले सामने आए हैं। जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए नमूनों में से 21 नमूने पॉजिटिव पाए गए हैं। मामलों के सामने आने के बाद पशु चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।
लंपी रोग मुख्य रूप से खून चूसने वाले कीटों, जैसे मक्खियों, मच्छरों और किलनी (Ticks) के काटने से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। बीमारी की शुरुआत में पशु को अचानक तेज बुखार आता है और वह सुस्त पड़ जाता है। इसके बाद शरीर की त्वचा पर करीब 2 से 5 सेंटीमीटर आकार की कठोर और गोल गांठें या छाले उभरने लगते हैं।
संक्रमित पशुओं की आंखों और नाक से पानी बहना, मुंह से लार टपकना तथा दूध उत्पादन में भारी कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु को अन्य पशुओं से अलग रखें और तत्काल पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
वहीं, लंपी स्किन डिजीज को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती। संक्रमित पशु का दूध अच्छी तरह उबालकर पीना सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी सावधानियों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

