मुख्य सरकारी कार्यालयों और स्कूलों के सामने फुटपाथों पर अवैध कब्जा; रोजाना लग रहा जाम और बढ़ रहीं दुर्घटनाएं
PACHWADUN MEDIA.COM
पछवादून का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला सहसपुर क्षेत्र इन दिनों पूरी तरह से अतिक्रमणकारियों के चंगुल में फंस चुका है। क्षेत्र के मुख्य मार्गों से लेकर फुटपाथों तक पर हुए अवैध कब्जों के कारण स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर समस्या से रोजाना भारी जाम और सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस ओर आंखें मूंदे बैठा है।

प्रमुख संस्थानों के नाक के नीचे बढ़ा अतिक्रमण
सहसपुर का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ कई प्रमुख सरकारी और शैक्षणिक संस्थान स्थित हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:-
श्री गुरुराम राय इण्टर कालेज (जहाँ रोज़ाना सैकड़ों छात्र-छात्राएं आते हैं) ,विद्युत वितरण केन्द्र तथा खण्ड विकास कार्यालय (BDO),पशु चिकित्सालय एवं कृषि विभाग का कार्यालय,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और वहाँ के चिकित्सकों का आवासीय परिसर
इन सभी महत्वपूर्ण कार्यालयों और स्कूल के ठीक सामने अतिक्रमणकारियों ने अपने पैर पसार लिए हैं। पैदल चलने के लिए बनाए गए फुटपाथों पर दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों ने पूरी तरह कब्जा कर लिया है, जिससे स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
सहसपुर-सभावाला संपर्क मार्ग बना ‘बॉटलनेक’
यही क्षेत्र सहसपुर-सभावाला संपर्क मार्ग को भी जोड़ता है, जो आगे चलकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पांवटा-देहरादून हाईवे को मिलाता है। इस लिंक रोड पर यातायात का भारी दबाव रहता है। लेकिन फुटपाथों और सड़कों के किनारों पर अवैध कब्जों के कारण यह मार्ग बेहद संकरा हो चुका है। इसके चलते यहाँ हर वक्त जाम की स्थिति बनी रहती है।
बढ़ती दुर्घटनाएं और प्रशासनिक उदासीनता
फुटपाथ गायब हो जाने के कारण स्कूली बच्चों और मरीजों को जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होना अब आम बात बन चुकी है। किसी बड़े हादसे का डर हर वक्त बना रहता है।, स्थानीय जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि इतने महत्वपूर्ण और व्यस्त क्षेत्र में खुलेआम हो रहे अतिक्रमण के बावजूद शासन और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या अभियान नहीं चलाया जा रहा है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया और यातायात व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

