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सहसपुर का इतिहास और इसकी स्थापना का वृत्तांत देहरादून की पछवादून घाटी (Western Doon) के विकास से गहराई से जुड़ा है। सहसपुर न केवल एक प्रशासनिक केंद्र है, बल्कि यह इस क्षेत्र की मिश्रित संस्कृति का एक पुराना गवाह भी है।
’सहसपुर’ शब्द संभवतः ‘सहस्र’ (हजार) और ‘पुर’ (नगर) से मिलकर बना है। कुछ जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र से ‘सहस्र’ (हजार) टका या मुद्रा का राजस्व प्राप्त होता था, जिस कारण इस परगने का नाम सहसपुर पड़ा। माना जाता है कि प्राचीन काल में यहाँ हजारों की संख्या में उपजाऊ खेत या छोटी-छोटी बस्तियां थीं।
यह क्षेत्र आसन नदी के किनारे स्थित होने के कारण कृषि की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध था, इसलिए इसे “हजारों खुशहाली वाला स्थान” या ‘सहस्रपुर’ कहा जाने लगा, जो समय के साथ अपभ्रंश होकर ‘सहसपुर’ बन गया।
ऐतिहासिक रूप से ‘पछवादून’ (पश्चिमी दून) का यह हिस्सा अपनी सघन आबादी और संपन्नता के लिए जाना जाता था। प्राचीन काल में समृद्ध और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए ऐसे नामों का प्रयोग किया जाता था।
ऐतिहासिक रूप से, यह क्षेत्र असन नदी के उपजाऊ कछारों के पास होने के कारण कृषि के लिए आदर्श था। यहाँ शुरुआती बसावट गढ़वाल नरेशों के काल में हुई थी, जब मैदानी इलाकों से किसान और व्यापारी यहाँ आकर बसे।
मध्यकालीन और सिखों का प्रभाव (17वीं शताब्दी),- श्रीगुरु राम राय का आगमन: 1676 में जब सिखों के सातवें गुरु के पुत्र गुरु राम राय देहरादून आए, तो उनके अनुयायी पूरे दून क्षेत्र में फैल गए। सहसपुर का विकास भी इसी काल के दौरान तेज हुआ क्योंकि यह देहरादून से पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित था।
गढ़वाल रियासत: यह क्षेत्र लंबे समय तक गढ़वाल के राजाओं के अधीन रहा। सहसपुर को एक महत्वपूर्ण राजस्व क्षेत्र के रूप में देखा जाता था क्योंकि यहाँ बासमती और अन्य फसलों की पैदावार बहुत अच्छी थी।
ब्रिटिश काल और प्रशासनिक स्थापना (19वीं शताब्दी) 1815 के बाद: गोरखा युद्ध के बाद जब अंग्रेजों ने देहरादून पर कब्जा किया, तो उन्होंने प्रशासनिक सुविधा के लिए जिले को कई परगनों और ब्लॉकों में बांटा।
पछवादून का केंद्र: अंग्रेजों ने सहसपुर को पछवादून (Western Doon) के एक प्रमुख व्यापारिक और पड़ाव स्थल के रूप में विकसित किया। देहरादून से विकासनगर और चकराता जाने वाले मार्ग पर स्थित होने के कारण यहाँ पुलिस चौकी और डाक बंगले जैसी व्यवस्थाएं की गईं।
नहर प्रणाली: ब्रिटिश काल में यहाँ सिंचाई के लिए छोटी नहरों का विकास हुआ, जिससे सहसपुर एक कृषि प्रधान केंद्र बन गया।
स्वतंत्रता के बाद और ‘ब्लॉक’ की स्थापना,सहसपुर ब्लॉक: आजादी के बाद, भारत सरकार ने ग्रामीण विकास के लिए ‘सामुदायिक विकास खंड’ (Community Development Block) प्रणाली शुरू की। सहसपुर को 1950 के दशक के दौरान एक आधिकारिक विकास खंड (Block) का दर्जा दिया गया।
विविधता: विभाजन के बाद और बाद के वर्षों में, यहाँ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से भी लोग आकर बसे, जिससे इसकी जनसांख्यिकी और संस्कृति अधिक समृद्ध हुई।

