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कहने को तो पछवादून क्षेत्र विकास की नई इबारत लिख रहा है, लेकिन सहसपुर ग्राम सभा की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। तमाम गुहार और प्रयासों के बावजूद यह ग्राम सभा आज भी विकास से कोसों दूर खड़ी है। ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे जिम्मेदार सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं।

चौखटें घिसीं, पर नहीं बदली किस्मत
सहसपुर के ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं को लेकर ग्राम प्रधान से लेकर क्षेत्रीय विधायक और यहां तक कि सांसद के दरवाजे भी कई बार खटखटा चुके हैं। हर बार उन्हें एक ही जवाब मिलता है— “जल्द काम शुरू होगा।” लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब उनकी सुध लेने को तैयार नहीं हैं।
बदहाली के आंसू रोते संपर्क मार्ग
क्षेत्र के संपर्क मार्गों की हालत बेहद खस्ता है। सड़कों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। सबसे बदतर स्थिति मुख्य मार्ग चकराता रोड से मनीत राणा के घर की ओर जाने वाले संपर्क मार्ग की है।
पेयजल लाइन का दंश: इस मार्ग को पेयजल लाइन डालने के नाम पर पूरी तरह खोद दिया गया था। कार्य पूरा हुए अरसा बीत गया, लेकिन सड़क की मरम्मत करना विभाग भूल गया है।
कीचड़ का साम्राज्य: जरा सी बारिश होते ही यह मार्ग कीचड़ से लबालब हो जाता है। पैदल चलना तो दूर, दुपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर है।
बीमारियों को न्योता देतीं गंदगी से अटी नालियां
गांव की ड्रेनेज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नालियां गंदगी से पटी पड़ी हैं, जिससे पानी की निकासी रुक गई है। जमा हुआ गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय निवासी इस बात से भयभीत हैं कि यदि समय रहते सफाई और कीटनाशक छिड़काव नहीं हुआ, तो गांव में महामारी फैल सकती है।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़कों की मरम्मत और नालियों की सफाई का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे। “हम केवल टैक्स देने और वोट देने के लिए नहीं हैं, हमें बुनियादी सुविधाएं भी चाहिए,” यह आक्रोश आज सहसपुर के हर घर में देखने को मिल रहा है।जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों से लोगों का उठा भरोसा।

