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राजधानी के शिमला बाईपास स्थित झीवरहेड़ी क्षेत्र में रसोई गैस की भारी किल्लत से परेशान ग्रामीणों के सब्र का बांध शुक्रवार सुबह टूट गया। पूरी रात लाइन में खड़े रहने के बाद भी जब गैस सिलेंडर नहीं मिले, तो आक्रोशित लोगों ने हाईवे पर चक्का जाम कर दिया। करीब पांच घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने 15 से 20 दिन पहले गैस की बुकिंग कराई थी। मोबाइल पर ‘डिलीवरी’ का संदेश तो प्राप्त हो गया, लेकिन घर तक सिलेंडर नहीं पहुंचा। झीवरहेड़ी, शक्ति विहार, देवलोक कॉलोनी और बद्रीविशाल कॉलोनी के निवासी शुक्रवार सुबह 6:30 बजे ही हाईवे पर खाली सिलेंडर लेकर बैठ गए। प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों की भी भारी संख्या रही।
सेना के जवानों की छुट्टियां भी लाइनों में बीतीं
प्रदर्शन में शामिल भारतीय सेना के जवान पवन डंडरियाल और सुरेंद्र सिंह ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे 10 से 20 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। परिवार के साथ समय बिताने के बजाय उनकी पूरी छुट्टी गैस सिलेंडर के लिए लाइनों में लगकर ही समाप्त हो गई।
गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों ने हीरा गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी के पास लगभग 17 हजार कनेक्शन हैं, लेकिन आपूर्ति सुचारू नहीं है। घरेलू उपयोग के सिलेंडरों को अवैध रूप से कमर्शियल उपयोग के लिए बेचा जा रहा है। स्थानीय लोगों को दर-दर भटकने पर मजबूर किया जा रहा है।
प्रशासन का हस्तक्षेप और आश्वासन
जाम की सूचना मिलते ही विकासनगर के तहसीलदार विवेक राजोरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को शांत कराया और आश्वासन दिया कि क्षेत्र में गैस की आपूर्ति तत्काल सुनिश्चित कर एजेंसी के वितरण कार्य की प्रशासनिक निगरानी की जाएगी तथा रोजाना क्षेत्र में गैस का वाहन भेजा जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे जिलाधिकारी (DM) कार्यालय का घेराव करेंगे।
तहसीलदार के ठोस आश्वासन के बाद सुबह 11:30 बजे जाम खोला गया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो पाया। प्रदर्शन करने वालों में विक्रम सिंह बिष्ट, सतीश सेमवाल, देवेंद्र सिंह गुसाईं सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

