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विकासनगर/ सहसपुर/ सेलाकुई (पछवादून)- पछवादून क्षेत्र में इन दिनों तंबाकू उत्पादों की कालाबाजारी का बोलबाला है। क्षेत्र के छोटे कस्बों से लेकर मुख्य बाजारों तक मुनाफाखोर सक्रिय हैं, जो तय कीमतों (MRP) को ताक पर रखकर तंबाकू उत्पादों को मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। इस अवैध वसूली से गरीब तबके की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।

‘दिलबाग’ के दामों में भारी उछाल
पछवादून क्षेत्र में सबसे अधिक बिकने वाला गुटखा “दिलबाग” कालाबाजारी का मुख्य केंद्र बना हुआ है। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि जो दिलबाग गुटखा (जर्दे सहित) पहले 5 रुपये में आसानी से उपलब्ध था, उसे अब दुकानदार 8 रुपये में बेच रहे हैं।
सिर्फ एक ब्रांड ही नहीं, बल्कि अन्य लोकप्रिय गुटखा ब्रांड्स और सिगरेटों की कीमतों में भी 20% से 50% तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। खुदरा विक्रेता इसके पीछे थोक व्यापारियों द्वारा माल की कमी और पीछे से महंगे दाम पर मिलने का बहाना बना रहे हैं।
गरीब जनता पर दोहरी मार
तंबाकू उत्पादों का सबसे ज्यादा सेवन करने वाला मजदूर और गरीब वर्ग इस महंगाई से सबसे अधिक प्रभावित है। दिनभर की दिहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अब इन उत्पादों की बढ़ी हुई कीमतों की भेंट चढ़ रहा है। ग्राहकों का आरोप है कि विरोध करने पर दुकानदार सामान देने से मना कर देते हैं या अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं।
विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल
क्षेत्र में खुलेआम हो रही इस लूट के बावजूद संबंधित विभाग (बाजार निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा विभाग) पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
नियमित चेकिंग का अभाव: बाजारों में रेट लिस्ट की जांच नहीं हो रही है।
कार्यवाही शून्य: कालाबाजारी की शिकायतों के बावजूद अभी तक किसी बड़े माफिया या जमाखोर पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
प्रशासनिक अनदेखी: विभाग की इस निष्क्रियता से मुनाफाखोरों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि बाजारों में छापेमारी की जाए और एमआरपी से अधिक दाम वसूलने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त विधिक कार्यवाही की जाए ।

