अजय शर्मा, सम्पादक,
PACHWADUN MEDIA.COM
आज जब पूरा देश रंगों के उत्सव होली के उल्लास में डूबा है, तब हमारे समाज ने एक कर्मठ सेवक और मैंने अपने बचपन का एक अभिन्न हिस्सा खो दिया है। ग्राम पंचायत अधिकारी राजपाल कश्यप का बीती रात आकस्मिक निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि उन सभी के लिए एक अपूरणीय क्षति है जिन्होंने उन्हें करीब से जाना।
बचपन की यादें और साझा सफर
कुछ रिश्ते समय और पद की सीमाओं से परे होते हैं। राजपाल के साथ बीता बचपन, वो गलियों में साथ खेलना और बेफिक्र हंसी-मजाक आज स्मृतियों के झरोखे में ठहर गए हैं। उनके असमय जाने ने मन को अंदर तक झकझोर दिया है। यह विश्वास करना कठिन है कि जिसके साथ जीवन के शुरुआती सपने बुने, वह आज इस संसार में नहीं है।
कर्तव्यनिष्ठ जनसेवक
राजपाल कश्यप ने उत्तराखंड के विभिन्न विकासखंडों में अपनी सेवाएं दीं। एक ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल हमेशा ग्रामीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने और जनमानस की सेवा करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। उनके सहकर्मियों और ग्रामीणों के बीच उनकी लोकप्रियता का प्रमाण आज उनके घर पर उमड़ा ‘चाहने वालों का तांता’ है।
एक शुन्य जो कभी नही भरेगा ।
एक हंसता-खेलता परिवार आज शोक में डूबा है। वह अपने पीछे पत्नी और एक छोटे पुत्र को छोड़ गए हैं। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस दिन रंगों से खुशियां मनाई जानी थीं, उसी दिन उनकी अंतिम विदाई (अंत्येष्टि) हो रही है।
राजपाल कश्यप भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा दी गई सेवाएं और उनकी मित्रता की सुगंध हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेगी। ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को यह वज्रपात सहने की शक्ति प्रदान करें।
अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि!

