पछवादून मीडिया संवाददाता, सेलाकुई ।
सेलाकुई क्षेत्र में कुछ दिनों पहले हुई ‘बदबूदार पनीर’ की जब्ती का मामला अब पुलिस प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है। इस मामले में बरती गई प्रक्रियात्मक खामियों और लापरवाही के कारण विभाग की भारी किरकिरी हुई, जिसके बाद प्रभारी आईजी रेंज सदानंद दाते की जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
मुख्य घटनाक्रम और पुलिस पर कार्रवाई
सोमवार को वरिष्ठ उप निरीक्षक (SSI) जितेंद्र कुमार और उनके साथ तीन अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने छापे की कार्रवाई के दौरान निर्धारित मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।
क्या था पूरा मामला?
कुछ समय पहले सेलाकुई पुलिस और एफडीए (FDA) की टीम ने एक संयुक्त कार्रवाई में एक दुकान से 250 किलो पनीर और 50 किलो दही बरामद किया था।
स्वास्थ्य विभाग ने मौके पर ही उस पनीर को ‘बदबूदार’ और खराब बताते हुए नष्ट कर दिया था।
दुकानदार (पीड़ित पक्ष) ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए पुलिस पर उत्पीड़न और प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसकी शिकायत पुलिस मुख्यालय में की गई थी।
CCTV फुटेज ने खोली पोल
इस मामले में एक CCTV फुटेज सोशल मीडिया और जांच टीम के सामने आया, जिसने पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। फुटेज के आधार पर यह दावा किया गया कि दुकान के बाहर रखा पनीर वापस गाड़ी में रखवाया जा रहा था, जबकि पुलिस का कहना था कि यह पनीर गाड़ी से उतारा गया था। इस विरोधाभास ने पुलिस की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना दिया।
”स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ नियमानुसार कार्रवाई की गई थी। जहाँ तक सीसीटीवी फुटेज का सवाल है, उसमें पनीर वापस गाड़ी में रखवाया जा रहा था। पनीर के सैंपल लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट का इंतज़ार है।”
— अजय सिंह, एसएसपी देहरादून
जांच में पाया गया कि पुलिस टीम ने मानकों का उल्लंघन किया, जिसके कारण पुलिस विभाग को जनता के बीच शर्मिंदगी उठानी पड़ी। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और लैब रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

