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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ‘श्री झंडा जी मेला’ इस वर्ष भी पूरी भव्यता के साथ शुरू होने जा रहा है। गुरु राम राय दरबार साहिब में आयोजित होने वाला यह मेला न केवल दून घाटी, बल्कि उत्तर भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। रविवार को पवित्र ध्वजदंड के आरोहण के साथ मेले की औपचारिक शुरुआत होगी, जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

ऐतिहासिक विरासत: 350 वर्षों की अटूट परंपरा
झंडा जी मेले का इतिहास लगभग 350 वर्ष पुराना है। मान्यताओं के अनुसार, सिखों के सातवें गुरु, श्री हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र श्री गुरु राम राय जी वर्ष 1676 (विक्रम संवत 1733) में दून घाटी पधारे थे। उन्होंने यहाँ अपना ‘डेरा’ डाला, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘देहरादून’ पड़ा।
होली के पांचवें दिन (पंचमी) पर गुरु महाराज के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विशाल ध्वज फहराने की परंपरा शुरू हुई। यह ध्वज (झंडा जी) शांति, सद्भाव और मानवता की सेवा का प्रतीक माना जाता है। देश-विदेश, विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आने वाली ‘संगतें’ इस पावन अवसर पर गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करती हैं।

धार्मिक अनुष्ठान और विधि-विधान
आज रविवार को मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 7 बजे से होगी ।
पवित्र स्नान: सबसे पहले पुराने ध्वजदंड को नीचे उतारा जाएगा। इसके पश्चात संगतें दूध, दही, घी, मक्खन, गंगाजल और पंचगव्य से पवित्र ध्वजदंड का स्नान कराएंगी।
गिलाफ आरोहण: वैदिक मंत्रोच्चार और अरदास के बीच नए गिलाफ (वस्त्र) चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें सादे और मखमली गिलाफों की परतें चढ़ाई जाती हैं।
ध्वज आरोहण: दोपहर 2 से 4 बजे के बीच श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज की अगुवाई में हज़ारों श्रद्धालुओं के सहयोग से नए झंडा जी का विधिवत आरोहण किया जाएगा।
सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं
मेले में जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और दरबार साहिब प्रबंधन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।
चिकित्सा सुविधा: श्री महंत इंदिरेश अस्पताल की डॉक्टरों की टीम मेला स्थल पर 24 घंटे तैनात है।
आपातकालीन सेवाएं: परिसर में ही एक अस्थाई ‘मेला अस्पताल’ संचालित किया जा रहा है और एम्बुलेंस सेवाएं निरंतर उपलब्ध हैं।
भक्ति और सिमरन का संगम
मेले की पूर्व संध्या पर शनिवार को दरबार के सज्जादे गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास ने संगतों को ‘गुरु मंत्र’ दिया। संगतें गुरु महाराज के भजनों और सिमरन में डूबी नजर आईं। विदेशी श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस आयोजन के वैश्विक महत्व को दर्शाती है।

